सिंहस्थ

सिंहस्थ – पुराणों में उललेख है समुद्र मंथन सेप्राप्त 14 रत्न में अमृत भी प्राप्त हुआ था । अमृत को लेकर देव-दानवों में संघर्ष से प्रयाग, नाशिक , उज्जैन व हरिद्वार में अमृत बूंद झलकी थी, जिससे चारों तीर्थ अति पूण्यप्रद व अमृतमय हो गए ।

मेष राशि में सूर्य और सिंह राषि में बृहस्पती होने पर सभी प्रकार की सुख, शांति देने वाले कुंभ महापर्व का योग बनता है । वैषाख मास में सिंह राशि का गुरू व मेष राषि के सूर्य होने पर उज्जैन में कुंभ माह होता है । उज्जैन का कुंभ सिंह राशि के गुरू में होने से सिंहस्थ महापर्व के नाम से प्रचलित है । सिंहस्थ मेला 12 वर्ष के अन्तराल से लगता है ।

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